दूध क्या है? [ Milk ] संगठन और प्रकार

दूध क्या है? [ Milk ] संगठन और प्रकार

दूध क्या है?, दूध का संगठन, दूध के प्रकार, पोषण में दूध का विशेष स्थान, स्तनधारियों के दूध का संगठन, दूध की आवश्यकता, दूध की उपयोगिता एवं महत्व।

दूध क्या है?

दूध हमारे भोजन का मुख्य अंग है। इसमें पोषक तत्व किसी भी खाध्य पदार्थ से कम नही होते है। छोटे बच्चों के लिए तो दूध ही एक मात्र भोजन है। यह समस्त स्तनधारी जीवों के बच्चों का प्रकृति प्रदत प्रारंभिक आहार है।

प्रत्येक स्तनधारी माता के शरीर में स्तन ग्रंथियां होती हैं जब यह माधव बच्चों को जन्म देती हैं। तब स्तन ग्रंथियों में एक प्रकार का शराब बनने लगता है तथा निकलने लगता है। इसी शराब को दूध कहा जाता है दूध से अनेक भोज्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं जो कि पर्याप्त पौष्टिक होने के साथ-साथ ही स्वादिष्ट भी होते हैं।

दूध का संगठन

यह एक सफेद रंग का तरल पदार्थ होता है इसकी संरचना या संगठन जटिल होता है इसमें कुछ पदार्थ तो पूर्ण तथा गुनीत अवस्था में रहते हैं तथा कुछ खोल आयडल एवं कुछ वायरस अवस्था में विद्वान रहते हैं।

दूध में प्रायः सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में विद्यमान होते हैं इसी से ही इसे संपूर्ण आहार माना जाता है प्रत्येक आयु के व्यक्ति के द्वारा दूध ग्रहण किया जा सकता है।

दूध में सर्वाधिक मात्रा में जल ही होता है तथा शेष 12 पॉइंट 75% ठोस पदार्थ होते हैं जिसमें वसा प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट खनिज लवण आदि होते हैं तथा अल्प मात्रा में कुछ घुलनशील गैस जैसे एंजाइम तथा रंग कड़वी होते हैं।

दूध का संगठन कुछ इस प्रकार का होता है:

दूध में मौजूद तत्वतत्वों की मात्रा का प्रतिशत
जल 87.25%
वसा 3.8%
प्रोटीन 3.5%
कार्बोहाइड्रेट्स 4.8%
खनिज लवण 0.65%

आदर्श संतुलित भोजन

दूध को एक आदर्श भोजन इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं जो संतुलित भोजन में होने चाहिए। दूध के विभिन्न पोषक तत्वों का सामान्य परिचय कुछ इस प्रकार है:

1. जल

दूध में सर्वाधिक मात्रा जलकी पाई जाती है सामान्यत है इसमें 80 से 90% मात्रा में जल होता है गाय के दूध में सबसे अधिक जल लगभग 95% तक होता है. जल प्रायः सभी उपस्थित पदार्थों को बोलने का कार्य करता है केवल बचा ही अलग कोलॉयडल के रूप में होती है.

2. वसा

दूध में 3 पॉइंट 80% भाग वसा का होता है. यह दूध में पायरस या इमल्शन के रूप में रहती हो. इसकी वसा सरलता से पट जाती है. तथा इस वसा में विटामिन ए तथा बी भी पाए जाते हैं.

अलग-अलग प्रकार के प्राणियों के दूध में वसा की मात्रा अलग-अलग होती है. सर्वाधिक वसा भैंस के दूध में पाई जाती है. इसका इस्तेमाल मक्खन, घी आदि पदार्थ बनाने में किया जाता है.

3. प्रोटीन

दूध में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती है. गाय भैंस के दूध में 3.30 प्रतिशत भाग प्रोटीन का होता है इसमें विद्वान प्रोटीन उत्तम प्रकार की होती है. इसमें प्रोटीन दो वस्तुओं में उपस्थित होती है दूध में कैसी नामक प्रोटीन कोलाइडी अवस्था में पाया जाता है.

इसके अतिरिक्त इसमें गलत अवस्था में लैपटॉप एल्बुमिन तथा लैक्टो ग्लोबुलीन नामक प्रोटीन रहती है। जब दूध से पनीर बनाया जाता है तब के सीन नामक प्रोटीन हीं ताप एवं अम्ल की क्रिया के परिणाम स्वरूप पनीर के छक्कों के रूप में जम जाता है तथा अन्य प्रोटीन शेष बचे पानी में रह जाते हैं।

4. कार्बोहाइड्रेट्स

दूध में लैक्टोज के रूप में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है इसकी मात्रा 4% से 5% तक रहती है यह घुलनशील अवस्था में विशेष उपयोगी ब कम मीठा होता है। यह लेक्टोज शरीर में कैल्शियम तथा फास्फोरस के अवशोषण में सहायक होता है तथा कुछ लाभदायक बैक्टीरिया उत्पन्न करता है इसी से दही जमती है।

5. खनिज लवण

दूध में उपस्थित खनिजों में से कैल्शियम फास्फोरस मुख्य हैं। साथ ही पोटेशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, और आयोडीन भी पाए जाते हैं। दूध जल जाने पर कत्थई भूरे रंग का हो जाता है। यह खनिजों के कारण ही होता है। यह खनिज घुलित अवस्था में होते हैं।

6. विटामिंस

दूध में कुछ विटामिंस पाए जाते हैं। जिनमें विटामिन ए तथा बी अधिक मात्रा में, विटामिन सी तथा डी कम मात्रा में होते हैं। दूध को उबालने से उनका विटामिन सी प्राय नष्ट हो जाता है।

7. एंजाइम

दूध में उपस्थित एंजाइम शरीर में होने वाली विभिन्न रासायनिक क्रियाओं के उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं यदि अधिक समय तक दूध बिना गर्म किए रखा रहता है तो वह फट जाता है या खट्टा हो जाता है। दूध में उपस्थित एंजाइम के कारण ही ऐसा होता है।

यह एंजाइम ही विभिन्न तत्वों के विघटन को प्रेरित करते हैं। दूध में उपस्थित लाइपेज नामक एंजाइम वसा को तथा लेफ्टीज नामक एंजाइम दूध के लेक्टोज को विघटित करता है।

8. रंग कण तथा गैसें

दूध में अति न्यून मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन गैस से भी घुलित अवस्था में रहती हैं। इसके अतिरिक्त फ़्लेविन नामक रंग कारण भी इसमें मौजूद रहते हैं।

विभिन्न स्तनधारियों के दूध का संगठन

दूध (100 gram)प्रोटीन (ग्राम में )कार्बोहाइड्रेट्स (ग्राम में)वसा (ग्राम में)कैलोरी खनिज लवण (मिग्रा में)
स्त्री का दूध 3.16.63.9550.1
गाय का दूध 3.34.83.6750.7
भैंस का दूध 4.35.08.81170.8
बकरी का दूध 3.74.75.7840.8

दूध के विभिन्न प्रकार

प्रकृति में मौजूद विभिन्न प्राणियों से प्राप्त दूध में पदार्थों का संगठन तो लगभग समान रहता है परंतु उनकी मात्रा थोड़ी भिन्न-भिन्न होती है. अनेक प्रकार की भौतिक तथा रासायनिक विधियों के द्वारा दूध के परिवर्तन से कई प्रकार के दूध बनाए जा सकते हैं जो कि कुछ इस प्रकार है:

1. शुद्ध दूध

यह पशुओं से प्राप्त दूध होता है इसमें किसी प्रकार की कोई मिलावट नहीं रहती है उदाहरण के लिए गाय का दूध, भैंस का दूध, बकरी का दूध इत्यादि.

2. खमीरी क्रत दूध

इसमें अमिलिया बैक्टीरिया द्वारा खमीरी करण करते हैं. मरे हुए दहिया मट्ठे को ही खमीरी कृत दूध कहते हैं यह आसानी से पच जाता है.

3. वसा रहित दूध

ऐसे दूध में उपस्थित वसा को निकाल लिया जाता है दूध में वसा दो विधियों द्वारा निकाली जाती है.

  1. एक विधि में दूध को उबालकर ठंडा कर दिया जाता है तथा उस पर जो मलाई आ जाती है उसे एक तरफ निकाल लिया जाता है इस प्रकार शेष बचा हुआ दूध वसा रहीत दूध होता है.
  2. दूसरी विधि में कच्चे दूध को ही मशीनों में घुमाया जाता है जिससे दूध में घुली वसा।क्रीम के रूप में एकत्र हो जाती है जिसे दूध से अलग कर लिया जाता है मोटे व्यक्तियों को इस प्रकार के ही दूध का इस्तेमाल करना चाहिए।

4. गाढ़ा दूध

इसमें दूध को प्रशासनिक विधि द्वारा सुखा कर शहद के समान खड़ा कर लेते हैं इसे अधिक सफर डालकर अधिक दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यह दूध ग्रस्त होने के साथ-साथ बच्चों के लिए भी ज्यादा उपयोगी नहीं रहता है।

5. पाउडर दूध

किस दूध में सबसे पहले रासायनिक विधि द्वारा दूध में उपस्थित पानी को सुखा दिया जाता है। दूध के अन्य पदार्थ पाउडर के रूप में एकत्र हो जाते हैं इसे ही पाउडर दूध कहते हैं।

बाज़ार में डब्बों में वसा रहित पाउडर का दूध मिलता है।

दूध से निर्मित खाध्य पदार्थ

दूध से अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ की प्राप्ति होती है यह निम्न प्रकार है:

1. क्रीम

दूध में वसा की पर्याप्त मात्रा होती है जो कि पायस की अवस्था में रहती है तथा पर्याप्त समय तक स्थिर रखने पर इसकी यह वसा एक तह के रूप में इसके ऊपर एकत्र हो जाती है यही वसायुक्त भाग क्रीम है।

2. मक्खन

दूध पर जमी मलाई को एकत्र करके बिलोने पर मक्खन तथा जल अलग अलग हो जाते हैं मक्खन जल से हल्का होने के कारण ऊपर आ जाता है फिर आसानी से उसे निकाल दिया जाता है।

मक्खन की अधिकांश मात्रा वसा की होती है यह 80 से 85% तक होती है।

3. घी

यह शुद्ध वसा है। यदि मक्खन को अधिक ताप पर गर्म किया जाए तो उस में से जल प्रोटीन तथा खनिज लवण अलग हो जाते हैं और शुद्ध वसा के रूप में घी बाहर आ जाता है।

कम तापमान होने पर यह जम जाता है। तथा गर्मियों के समय में यह द्रव अवस्था में पाया जाता है।

4. दही

जब दूध में उपस्थित प्रोटीन तथा अन्य पोषक पदार्थ आलिया बैक्टीरिया की उपस्थिति के कारण जम जाते हैं तो इस जमे हुए दूध को दही कहते हैं। दूध से दही बनाने के लिए उसमें जामुन प्रक्रिया करने के लिए कुछ दही मिलाई जाती है।

5.मटठा

दही के खट्टा होने पर उसे मत देते हैं तो उसमें से मक्खन तथा जल अलग अलग हो जाते हैं। घी या बसा को निकाल लेने पर जो शेष पदार्थ बसता है उसे मट्ठा कहते हैं।

6. पनीर

यदि हुए दूध में नींबू यह दूसरा खट्टा पदार्थ मिला रहते हैं तो दूध में उपस्थित प्रोटीन थक्कों के रूप में जम जाती है। तथा दूध का शेष भाग पानी के रूप में अलग हो जाता है इस जमे हुए पदार्थ को ही पनीर कहते हैं।

7. खोया

जब हम दूध को एक निश्चित समय अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी पांच के साथ बोलते हैं तो उसमें से पानी की मात्रा जल वाष्प बनकर उड़ जाती है और केवल द्रव की अवस्था में दूध ही शेष बसता है इस बचे हुए दूध को खोया कहते हैं।

इसका प्रयोग अनेक प्रकार के मेवे तथा मिठाई बनाने के लिए किया जाता है।

दूध की दैनिक आवश्यकता

दूध की दैनिक आवश्यकता प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता पड़ती है छोटे बच्चों करने वाली माता तथा गर्भावस्था में दूध की अधिक आवश्यकता होती है।

हम आपको एक सारणी की मदद से शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों प्रकार के व्यक्तियों के लिए दूध की उपयोगिता बता रहे हैं।

क स आयुशाकाहारीमांसाहारी
1.3-4 वर्ष 600 ग्राम 350 ग्राम
2.5-12 वर्ष 450 ग्राम 240 ग्राम
3.13-21 वर्ष 260 ग्राम 140 ग्राम
4.वयस्क स्त्री व पुरुष 250-400 ग्राम 160 ग्राम
5.दुग्धपान करने वाली स्त्री 1 किलोग्राम 600 ग्राम
6.गर्भावस्था 1 किलोग्राम 500 ग्राम

1 लीटर दूध से लगभग 600 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।

दूध की स्वच्छता

दूध एक आदर्श भोजन होने के साथ-साथ एक ऐसा पदार्थ है जो बहुत जल्दी खराब हो जाता है क्योंकि इसमें बड़ी शीघ्रता से जीवाणु पनपते हैं। इसीलिए इसकी स्वच्छता पर हमें विशेष ध्यान देना चाहिए इसमें मुख्यत है यह बात है कि गाय भैंस का किसी भी प्रकार का रोग नहीं होना चाहिए।

  • गाय या भैंस को किसी प्रकार का रोग नहीं होना चाहिए।
  • गाय या भैंस को बांधने का स्थान स्वच्छ और साफ सुथरा होना चाहिए।
  • दूध धोने वाला बर्तन भी साफ होना चाहिए।
  • दूध निकालने से पहले हमें अपने हाथों तथा गाय और भैंस के थनों को अच्छे से धो लेना चाहिए।
  • दूध धोने का बर्तन एकदम साफ सुथरा होना चाहिए और प्लास्टिक के बर्तन में दूध नहीं धोना चाहिए।
  • दूध को उबालने से पहले कपड़े से छान लेना चाहिए तथा उबालने के बाद दूध को ढक कर रख देना चाहिए।
  • गर्मियों के दिनों में दूध को खराब होने से बचाने के लिए उबालकर ठंडा करके फ्रिज में रख देना चाहिए।

दूध की उपयोगिता एवं महत्व

  • दूध एक सम्पूर्ण पौष्टिक संतुलित आहार है। क्योंकि यह सभी पोषक तत्वों से युक्त होता है।
  • दूध में उपस्थित विटामिन शरीर के निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • दूध में उपस्थित कैल्शियम व फास्फोरस से हमारी हड्डियां में दांत मजबूत होते हैं।
  • दूध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
  • वृद्धावस्था तथा प्रौढ़ावस्था में शारीरिक क्षमताओं की वृद्धि के लिए दूध अत्यंत उपयोगी है साथ ही इसका पाचन की आसान होता है।
  • गर्भावस्था में स्तनपान के अवस्था में दूध का सेवन अवश्य करना चाहिए। यह बच्चा व्यापार दोनों के लिए अति आवश्यक और उत्तम पौष्टिक आहार है।
  • विभिन्न रोगों की अवस्था में दूध का उपयोग एकूण पौष्टिक आहार के रूप में किया जाता है।
  • दैनिक जीवन में दूध एवं दूध से बने पदार्थों का सेवन भी आवश्यक है यह पोस्ट तक दोनों को बढ़ाने में सहायक है।
  • रात्रि में सोने से पूर्व एक गिलास दूध का सेवन अवश्य करें यह पेट में गैस नहीं बनाता है और पाचन के लिए बनी रहती है।

दूध के प्रयोग से सावधानियाँ

  • सदैव उबला हुआ दूध ही प्रयोग करना चाहिए। कच्चा दूध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
  • दूध सदैव मीठा पीना चाहिए फीका दूध नुकसानदायक होता है।
  • बहुत तेज गर्म दूध नहीं पीना चाहिए और नहीं अधिक ठंडा दूध पीना चाहिए। ठंडा दूध शरीर में बनाता है।
  • दूध के साथ कोई भी नमकीन पदार्थ नहीं खाना चाहिए इससे त्वचा संबंधी रोग सफेद दाग होने का खतरा बना रहता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post